आरक्षण : दुर्भाग्यपूर्ण लोगों के लिए एक छोटा सा हर्जाना: -नृपेंद्र बाल्मीकि
देव संस्कृति विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढाई पूरी कर नृपेन्द्र बाल्मीकि आज हैदराबाद में वेब पोर्टल इंडी लिंक्स डाट कॉम मे मुख्य कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत है। शुरु से ही वह सामाजिक मुद्दो और वर्तमान परिप्रेक्ष्य पर अपनी बातो को लोगो के सामने पहुंचाने का काम करते आये है। दैनिक जागरण और ईटीवी उत्तराखंड मे इंटर्नशिप से प्राप्त अनुभवो को पत्रकारिता के क्षेत्र मे लगा रहे है। वह नयी पीढी के लेखक के साथ ही अच्छे कवि भी है। आइये पढ़ते हैं आरक्षण पर उनका ये आलेख। आज़ादी के 70 साल बाद भी राष्ट्रहित के लिए उठाए गए कुछ अहम मुद्दे आज भी अपनी प्रारंभिक अवस्था में रेंगते नजर आते हैं। भारत में आरक्षण भी उन्हीं रेंगते मुद्दों में से एक है, जो लंबे समय से एक विवादित शक्ल के रूप में किसी पत्थर पर काई समान जमा पड़ा है। दलितों, अल्पसंख्यकों के लिए जहां आरक्षण आशा की किरण प्रतित हुआ तो वहीं स्वर्णों के लिए एक घाव। समाज के निचले, शोषित वर्गों के सामाजिक व आर्थिक उत्थान के लिए बनाई गई व्यवस्था, आज आग की लपटों में दिन बसर कर रही है। आल...