Posts

हर किसी के पास एक कहानी है : इरफ़ान

Image
गुफ्तगू ...  राज्य सभा टी वी पर प्रसारित होने वाला एक ख़ास प्रोग्राम  जो अपने फॉर्मेट के दूसरे शोज़ से बिलकुल अलग बिल्कुल अलहदा है।फिल्म और  समाज के विभिन्न क्षेत्रोँ में सक्रिय ,रचनात्मक लोगों के साक्षात्कार पर आधारित इस कार्यक्रम के होस्ट हैं सैय्यद मोहम्मद इरफ़ान। इरफ़ान जी की सिर्फ आवाज़ ही नहीं अंदाज़ भी बेहद  निराला है। इनकी सबसे ख़ास बात यह है कि ये  वो अपने गेस्ट पर बेवजह हावी नहीं होते बल्कि उन्हें  पूरी तरह से खुलने और उन्हें उनकी  कहानी उन्हीं की ज़ुबानी सुनाने का पूरा  मौका देते हैं। इरफ़ान सिर्फ एक अच्छे एंकर ही नहीं बल्कि  सामाजिक बदलावों और उसकी प्रवृतियों पर भी अपनी पैनी नज़र रखने वाले एक जागरूक नागरिक भी  हैं। गुफ्तगू और रेडियो की दुनिया के बेहद लोकप्रिय और  जाने माने एंकर से हमने भी कुछ गुफ्तगू की। इरफ़ान जी , हम अपने इंटरव्यू की शुरुआत भी वहीँ से करते हैं जहां से आमतौर पर आप भी शुरू करते हैं अपने प्रोग्राम गुफ्तगू में , तो सबसे पहले हमें ये बताइये कि आपकी पैदाइश कहाँ की है ? गुफ्तगू तक...

सबसे ख़तरनाक- पाश

Image
  जिसका विज़न, जिसका चिंतन  अपने देश काल का जितनी दूर तक अतिक्रमण कर सकने में सक्षम होता है वो कवि , वो विचारक उतनी ही सदियो तक लोगों के दिलों, उनकी स्मृतियों में  ज़िंदा रहता है।  पाश भी एक ऐसे ही कवि हैं। उनकी कवितायेँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी कि उस वक़्त रही होंगी जब लिखी गई होंगी। आज पाश के जन्मदिन पर उनकी एक कविता, जिसे खूब पढ़ा और गाया जाता  रहा है, लेकिन फिर भी जिसे अपने ब्लॉग के ज़रिये शेयर करने का मोह मैं नहीं छोड़ पाई।  इस कविता की एक एक पंक्ति मूलयवान और प्रासंगिक है। पढ़ें  मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है सबसे ख़तरनाक नहीं होता कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है जुगनुओं की लौ में पढ़ना मुट्ठियां भींचकर बस वक्‍़त निकाल लेना बुरा तो है सबसे ख़तरनाक नहीं होता सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना तड़प का न ह...

मुस्लिम महिलाओं को मिली 1000 साल पुरानी कुप्रथा से आजादी....

Image
रीतिका शुक्ला  सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसकी वाह-वाह भी बहुत हुई कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतान्त्रिक देश भारत में मुस्लिम महिलाओं ने इतने लंबे समय बाद तीन तलाक के मसले पर अपने हक की लड़ाई जीत ली है। ताज्जुब की बात तो यह है कि भारत में जिस तीन तलाक पर अब फैसला सुनाया गया है, वह दुनिया के 22 देशो में पहले से पूरी तरह बैन है। अच्छी बात यह है कि इस सूची में  बांग्लादेश, सीरिया, पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देश भी शामिल हैं। प्रेरणा लेने वाली बात यह है कि कई देशों में तो मुस्लिम जजों की खंडपीठ ने महिलाओं का दर्द समझा और यह फैसला लिया।     एक बार में तीन तलाक के मुद्दे पर पांच महिलाओ शायरा बानो, गुलशन परवीन, आफ़रीन, आतिया साबरी, इशरत की जंग की जीत हुई। बात सिर्फ एक या पाँच महिलाओ का नहीं है, बात है महिलाओ के मौलिक अधिकारों के हनन का है। यहो  भी साफ़ एक बात साफ़ है कि पुरुषों को सब अधिकार जन्म से मिलते है, जबकि महिलाओ को अपने अधिकारों की लड़ाई लड़नी पड़ती है। पूरा देश ने इस फैसले का स्वागत किया, इसमें वो लोग ...