मेरी माँ के हाथ : एक साधारण महिला की असाधारण सच्ची कहानी

रीतिका शुक्ला 



डायरेक्टर : मकरंद देशपांडे

राइटर : नादिरा ज़हीर बब्बर

आर्टिस्ट्स :नादिरा ज़हीर बब्बर

मकरंद देशपांडे और नादिरा ज़हीर बब्बर 
 ये नाटक कॉम .रज़िया सज्जाद ज़हीर पर आधारित है।  यह एक साधारण महिला की असाधारण सच्ची  कहानी है , जो एक पोलिटिकल वर्कर, एक  सोशल एक्टिविस्ट और एक महान इंसान है। साथ ही वो एक प्रख्यात उर्दू लेखक और लखनऊ यूनिवर्सिटी में  प्रोफेसर थी। यह एक हिंदी ड्रामा है जो इंटरनेशनल वीमेन डे पर लखनऊ में हो रहा है।
दीपक कबीर ( दस्तक मंच से  )
        ये प्ले हमारी आधी आबादी के  संघर्ष को सलाम है। दस्तक और लखनऊ कलेक्टिव प्रस्तुत कर रहे है ,जो संगीत नाट्य एकेडमी में आज शाम 7:30 से होगा। इसी सिलसिले में हमारी मुलाकात दस्तक मंच से दीपक कबीर से हुई। उन्होंने हमको" मेरी माँ के हाथ " प्ले से रूबरू कराया। यह प्ले राजिया सज़ाद जहीर के जीवन पर आधारित है। जो लखनऊ से ताल्लुक रखती है। उनका आधुनिक कथा साहित्य में विशेष स्थान रहा है। इन्होंने कई विषयों पर लिखा, लेकिन मुख्य रूप से महिलाओं के दुःखों, उनके बौद्धिक संघर्ष, घर की समस्याओं और आत्म अभिव्यक्ति की समस्याएं और आत्म-साक्षात्कार, सहज संकोच और भावनात्मक जुनून से जुड़े हुए हैं। उनकी कहानियो में समाज के लिए सन्देश होता है जिनमे आधुनिक सन्दर्भ में बदलते हुए पारिवारिक मूल्यों को उभरने का सफल प्रयास मिलता है।


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