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डिप्रेशन या अवसाद जीवन का अन्त नहीं

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दुनिया को अपना हंसता हुआ चेहरा दिखाने वाला शक्स अन्दर ही अन्दर कितना टूटा हुआ होता है, यह किसी को नहीं पता होता । ऐसा ही कुछ  सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी हुआ । हाल ही में सुशांत सिंह के सुसाइड ने सभी को स्तब्ध कर दिया है और एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कौन सी ऐसी वजह थी, जिसके कारण उन्हें इतना बड़ा कदम उठाना पड़ा । सुसाइड करना या इसके पीछे के कारण को समझना बहुत जरूरी है, क्योंकि कोई ऐसे ही सुसाइड नहीं करता है । सुसाइड के पीछे बहुत लंबा डिप्रेशन होता है । इंसान का अकेलापन होता है, वह अकेलापन जो वो किसी के साथ बांट नहीं सकता, बता नहीं सकता । वह कैसा फील करता है, वह दिखा नहीं सकता ।  किसी के अंदर क्या चल रहा है इसे समझने के लिए आपको उस इंसान के अंदर झांक कर देखना पड़ेगा । उसे सुनना पड़ेगा और सुनने के लिए बहुत पेसेंस चाहिए होता है, यानी अगर आपको उस व्यक्ति को समझना है, तो आपको पहले उनकी सारी बातें सुननी पड़ेगी, वह आपको हजार बातें बताएंगा और उन बातों में से आपको उनके अंदर तक जो दर्द है, उसको समझना पड़ेगा । कहने में बड़ा आसान है कि किसी के दर्द को सुनकर ...

फिर शर्मसार हुई इंसानियत............#RIPHumanity, # JusticeForElephant

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“The greatness of a nation and its moral progress can be judged by the way its animals are treated.”                                                                            ― Mahatma Gandhi महात्मा गांधी ने उपरोक्त लाइन्स में कहा है कि “किसी देश की महानता और उसकी नैतिक उन्नति का अंदाजा हम वहां जानवरों के साथ होने वाले व्यवहार से लगा सकते हैं।” गांधी जी के ये अनमोल वचन हमें मानवता की महत्वता सिखाते है, लेकिन हाल ही में केरल में हुई गर्भवती हाथिनी की निर्मम हत्या ने मानवता को शर्मशार कर दिया है । यह घटना केरल के मलप्पुरम जिले की है, जहां घायल हाथिनी की मृत्यु 27 मई को वेल्लियार नदी में हुई थी । देखते ही देखते नदी में खड़ी घायल हाथिनी की मौत का वीडियो वायरल हो गया । उसके पोस्टमॉर्टम के बाद यह तथ्य सामने आया कि वो अकेली नहीं थी, उसके पेट में बच्चा पल रहा था । उसकी हत्या मनुष्यों...

आप मोदी विरोधी क्यों हैं ? : पूजा श्रीवास्तव

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आखिर आप मोदी कितना विरोध क्यों करते हो ? ये एक ऐसा सवाल है जो मुझसे अनगिनत बार पुछा जाता है। कभी मुझे कांग्रेसी  तो  कभी  कम्युनिस्ट घोषित किया जाता है और कभी कभी तो  देशद्रोही। ये एक अजीब सी स्थिति है जहाँ सत्ता और सरकार की आलोचना करने का अर्थ या तो किसी अन्य पार्टी के समर्थक होना है या देशद्रोही होना है , जहाँ आपके एक निष्पक्ष और जागरूक नागरिक होने की सारी संभावनाओं को ख़ारिज  कर दिया जाता है। ये निश्चित एक भयावह स्थिति है जहाँ आपके एक नागरिक होने के अधिकार और संभावना को छीना जा रहा है और आपको एक पार्टी या विचारधारा से ज़्यादा एक व्यक्ति का पपेट बनने पर मजबूर किया जा रहा है क्योंकि अगर आप पपेट नहीं हैं तो देश द्रोही हैं।                                                             २०१४ में जब मोदी जी  को प्रधानमंत्री के प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया...

शक्ति की आराधना का उत्सव और शक्ति का उपहास : पूजा श्रीवास्तव

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        नवरात्रि का आरम्भ हो चुका  है। नवरात्रि यानि भक्ति का उत्सव , शक्ति की आराधना का उत्सव।  भक्तिमय माहौल में घरों और मंदिरों में देवी की आराधना हो रही है। शक्ति पूजन के इस उत्सव में ये देखना बेहद प्रासंगिक है कि हमारी अपनी मानसिकता स्त्रियों को लेकर किस तरह की है ? विशेषकर यदि उस स्त्री से हमारा किसी भी प्रकार का वैचारिक मतभेद है। आइये देखते हैं डिजिटल इंडिया के इस दौर में महिलाओं खासकर उन तीन महिलाओं के बारे में किस प्रकार की टिप्पणी की  जाती रही है  जो राजनीति के क्षेत्र में अपना एक ख़ास मुकाम रखती हैं।                                            सबसे पहले बात सोनिया गाँधी की। भारत के सबसे मज़बूत और ख़ास  राजनैतिक घराने की बहू  के रूप में सोनिया गाँधी तब तक सेफ़  थीं  जब तक वो राजनीति  के मैदान में नहीं कूदी थीं। राजनीति में उतरते ही उनके भूत ,वर्तमान और भविष्य की जड़ें खोदी जाने लगीं। उनके हिंदी उ...

उत्तर प्रदेश की चुनावी खिचड़ी

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बुआ और बबुआ का चुनावी कनेक्शन   P.C:Google किस्सा कुर्सी का .....जी हाँ यह सारा किस्सा कुर्सी का ही है, जिसके लिए दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैऔर जिन बुआ- बबुआ की बात हम कर रहे है , वो यूपी की राजनीति के दो प्रमुख चेहरे मायावती और अखिलेश है | बुआ और बबुआ का प्यार देख कर कौन कहेगा कि कभी मायावती ने सपा से कभी हाथ न मिलाने की घोषणा की थी | खैर वो भी एक दौर था जब मुलायम सिंह सपा के सुप्रीमो हुआ करते थे | तब 1995 में मायावती के ऊपर गेस्ट हाउस कांड हुआ था, मायावती ने इसके लिए मुलायम सिंह पर आरोप लगाया था और कभी एक दूसरे का मुँह न देखने की बात कही थी | समय बदल चुका है और मौके का दस्तूर समझना भी जरूरी है कि दुश्मन भी दोस्त समय की जरूरत है | वो कहते है न दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है और राजनीति में कब दुश्मन दोस्त और दोस्त दुश्मन हो जाए कहा नहीं जा सकता | पुरानी बातो पर मिट्टी डालते   हुए, बुआ जी ने पुराने सभी गिलेसिकवे भुलाकर अपने भतीजे को गले लगा लिया | अब नया इतिहास रचा जाएगा, लोकसभा चुनाव नजदीक है और ऐसे में इस गठबंधन का इतिहास देखना भी जरूरी है | यह बात 25 साल ...

समानता और गरिमापूर्ण जीवन जीना, सबका मौलिक अधिकार

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*रीतिका शुक्ला  सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 6 सितम्बर 2018 को एकमत से 158 साल पुरानी IPC की धारा 377 के उस हिस्से को निरस्त कर दिया , जो सहमति से बनाए गए अप्राकृतिक यौन संबंध को अपराध की श्रेणी में रखता था|  इस धारा के इस हिस्से के हटने के बाद समलैंगिक समुदाय के लोग और जो उनके इस लड़ाई के दौरान समर्थक रहे है , उन्होंने इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत जोश के साथ किया | मै और मेरी ही तरह कई और समर्थक भी उनकी इस जीत के जश्न में शामिल हुए , लेकिन वहां पर आई मीडिया ने इस पूरी तस्वीर को ही बदल डाला | हमको समर्थक से समलैंगिक बना दिया गया, यह मुझे सुबह का अखबार देखकर पता चला | हम जिस क़ानून की बात कर रहे है वो अंग्रेजो के जमाने का है और तब यह अपराध माना जाता था | आजादी के बाद हमारा संविधान बना, जिसमे हम सभी भारतवासियों को मौलिक अधिकार प्राप्त हुए | इन अधिकारों में समानता का अधिकार और गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार भी शामिल है | हर बार हम जब समानता की बात करते है तो बस स्त्री या पुरुष की समानता की बात होती है और हम सब समलैंगिक और सेक्स माइनॉरिटीज को भूल ज...

आह से वाह तक का सफर : अर्चना सतीश

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आँखों में आत्मविश्वास की चमक , होठों पर आत्मीयता भरी मुस्कान और वाणी में किसी के भी  मन को छू जाने वाले  ज्ञान और अनुभूतियों  का सहज प्रवाह।   ये पहचान है उनकी जिन्हे लगभग पूरा लखनऊ अर्चना सतीश के नाम से जाता है। प्रोफेशनली वो एक न्यूज़ रीडर हैं , एंकर हैं लेकिन उनकी पहचान इतनी ही नहीं इससे बहुत ज़्यादा है। वो एक प्रतिभाशाली एंकर और न्यूज़ रीडर होने के साथ साथ एक आध्यात्मिक व्यक्ति भी है।अपने आस पास के लोगों के लिए  वो प्रेम , करुणा और सकारात्मक ऊर्जा से भरी हुई उनकी दीदी हैं जिनकी प्रार्थनाओं में एक आध्यात्मिक बल है।  जिनसे लोग अपने सुख दुःख बांटने में बिलकुल नहीं हिचकिचाते। यश भारती सम्मान से सम्मानित अर्चना जी अपने आत्मबल से कैंसर जैसे रोग को भी मात दे चुकी हैं। दीदी , आमतौर पर लखनऊ में रहने वाले लोग और खासकर दूरदर्शन आकाशवाणी से जुड़े लोग आपको न्यूज़ रीडर और एंकर के रूप में ही जानते हैं। मैंने भी सबसे पहले आपको इसी रूप में जाना था।  यानी एक तरह से ये आपकी प्राथमिक पहचान है। तो सबसे पहले हम आपके इसी रूप की बात करते हैं। कैसे और कब ...